हलो दोस्तो! पूरी दुनिया हमें यह अहसास कराती रहती है कि हम भारतीय बहुत ज्यादा बोलते हैं। मोबाइल फोन कंपनियों ने भी अपने अनेक अध्ययन में पाया कि हम भारतीयों का बक-बक करने में जवाब नहीं। जब तमाम तरह के अध्ययनों से यह तथ्य साबित किया जा रहा है तो वाकई भारतीय ज्यादा बोलते होंगे। यूँ तो पुरुष यही प्रचार करते रहते हैं कि औरतें ही बातूनी मशीन हैं पर इस सच्चाई से भी पुरुषों को एतराज नहीं होना चाहिए कि मोबाइल या अन्य प्रकार की फोन सुविधा जितनी पुरुषों को है उतनी महिलाओं को नहीं है। मतलब भारतीय पुरुषों को भी बातें करने में महारत हासिल है ।
फिर क्या कारण है कि जब महत्वपूर्ण बातें उन्हें करनी होती हैं तो नहीं कर पाते हैं, खासकर महिलाओं के साथ, महिलाओं से संबंधित। अंग्रेजी के एक निहायत बुजुर्ग (उम्र के लिहाज से) नामचीन लेखक ने एक बार अपने कॉलम में लिखा कि आज जब मैं कई महिलाओं को उन पर आए क्रश के बारे में बताता हूँ तो वे ये कहती हैं कि काश 50 या 60 वर्ष पहले कहा होता क्योंकि मेरे दिल में भी वही जज्बा था। मैं भी तुम्हें देखकर तड़प जाती थी। लेखक ने उन महिलाओं के सवाल पर लिखा कि मैं डरता था कि पता नहीं तुम्हारा क्या जवाब या प्रतिक्रिया हो। आगे लिखते हैं, अब मलाल करने के सिवाय चारा भी क्या है। सच अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
पर आश्चर्यजनक रूप से आज भी लाखों, करोड़ों नौजवानों की श्रीमान लेखक जैसी ही दशा है। शायद वे भी 30-40 वर्ष बाद अपनी क्रश से नहीं बल्कि किसी और के सामने अपने दिल में दबी बात को जुबाँ पर लाते हुए मिल जाएँ। बड़े लेखकों की बड़ी बात होती है। उनकी मित्र मंडली अंतिम समय तक गाहे-बगाहे मिलती-जुलती रह सकती है पर बेचारे आम नौजवान की क्रश इस दुनिया की भीड़ में कहाँ गुम हो जाएगी कौन जाने।
दरअसल, भारतीय पुरुष यूँ तो अपनी बहादुरी एवं जवाँमर्दी की खूब डींगे मारते हैं। उनकी बातें सुनो तो दफ्तर व धंधे में उससे बड़ा तीसमार खाँ कोई नहीं है। कई को तो अपने ज्ञान पर इतना घमंड होता है कि औरतों का सही लिखा हुआ भी उन्हें गलत दिखाई देता है। लड़कियों के सामने जब वे थोथे आत्मविश्वास से भरकर हाँकते हैं तो ऐसा लगता है मानो भेजे से अकल उबाल मारकर बाहर निकल आएगी पर बेचारे सामने वाली को ये नहीं बता पाते कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मुझ पर रहम करो। पूरा समय या तो बेकार की बातों या जरूरत से ज्यादा काम की बातों में निकल जाता है और समय के साथ ही देखते ही देखते लड़की भी वहाँ से निकल जाती है।
NDतब बेचारे, संकोच के मारे यही सोचते रहते हैं काश कोई ऐसी मशीन होती जो दिल की बात उस तक बिना बोले पहुँचा देती। पर सदियों से चले आ रहे नाकाम सैदाइयों को कौन बताए कि न तो ऐसी मशीन बनी है और न ही आने वाले वर्षों में इसकी ईजाद की कोई आशा है। बेहतर यही है कि आप थोड़ा हौसला बढ़ाएँ और अपनी पसंद के सामने अपनी जुबान खोल दें। शायद भारतीय मर्दों के इसी दर्द को एक मुंबइया फिल्म में बयान किया गया है।
'हौसला और करो, मुँह से कहते न डरो, दिल न तोड़ेंगे अपना वादा है।' फिल्मों में तो बड़ी आसानी से हीरो-हीरोइनें अपना हाले दिल गाकर बयान कर डालते हैं पर वास्तविक जीवन में ये बेचारे नौजवान कैसे अपनी बात रखें ।
ज्यादातर पत्र इसी मसले को लेकर होते हैं कि निजीपन लिए संवाद कैसे शुरू किए जाएँ। हिंदी भाषी लड़के-लड़कियों के सामने तो ये समस्याएँ और भी गंभीर रूप लेकर खड़ी हो जाती हैं। लड़कों को लगता है कि कहीं लड़की की या उसके पोशाक की तारीफ कर दी और लड़की ने बुरा मान लिया तो उसकी शराफत पर ही सवालिया निशान लग जाएगा। दोस्ती की भी बलि चढ़ी सो अलग। लड़कों का डर भी बेजा नहीं लगता है क्योंकि अक्सर लड़कियाँ सहजता से मना करने के बजाय कुछ ज्यादा ही हल्ला-गुल्ला मचाने लगती हैं।
बातचीत बंद कर देना अपने परिवार और दोस्तों में बताना व मजाक उड़ाना सचमुच किसी भी लड़के को शर्मिंदगी में डाल सकता है। अब कोई बिल्कुल ही मजनुँओं वाली हरकतें करे तो उससे सावधान रहना या खौफ खाना तो सही है पर छोटी सी बात का बतंगड़ बना देना कि मुझे ऐसी-वैसी लड़की मत समझना, मैं बड़ी चरित्रवान हूँ, ऐसी हालत में बेचारे लड़कों की शामत ही आ जाती है।
किसी भी लड़की को करीब से जानने का एक ही तरीका है कि पहले उससे आम बातचीत करनी चाहिए। उसे जानने के लिए साधारण दोस्त बनने की जरूरत है। रोजाना के कामकाज से सबंधित संवाद बनाना चाहिए। शालीनता के साथ उसके साथ पेश आना चाहिए। यदि उसके प्रति आपके दिल में इज्जत है तो वह आपकी बातों और व्यवहार से भी झलक जाएगा जो आपकी दोस्ती को मजबूत करने में सहायक होगा।
समय के साथ-साथ यही दोस्ती प्यार के इजहार का साहस भी जरूर देगी। जल्दबाजी में केवल औपचारिक सी शादी होती है जिसमें सबकुछ बाहरी तौर पर जोड़-घटाव किया जाता है। जात-पात, खानदान, नौकरी, रंग-रूप, शिक्षा मैच कर गया शादी कर लो। प्रेम के लिए एक-दूसरे को समझने, पसंद करने की जरूरत होती है। इसलिए धैर्य रखें। लड़के-लड़कियों को समाज में अलग-अलग रखने के कारण दोनों ही एक-दूसरे को सशंकित ढंग से देखते हैं पर भरोसा रखें, दोनों मनुष्य हैं और यकीन मानें दोनों लगभग एक ही जैसा सोचते हैं।
Sunday, May 9, 2010
पहली मुलाकात है जी...
हेलो दोस्तो! बहुत सारे युवक इस बात का ही रोना रोते रहते हैं कि उनकी किसी लड़की से दोस्ती नहीं होती है। कोई उपाय बताएँ कि कैसे वह लड़कियों से दोस्ती करें, कैसे उन्हें गर्लफ्रेंड बनाएँ। पर जब किसी लड़की से दोस्ती हो जाती है तब फिर यह विकट समस्या सामने आती है कि एकांत में वह उनसे कैसे और क्या संवाद बनाएँ।
युवती दोस्त के साथ कई लोगों के बीच बातचीत करना, हँसी-मजाक करना और थोड़ा रूमानियत का अहसास करना एक बात है लेकिन उसी के साथ एकांत में संवाद बनाना बिल्कुल अलग।
किसी लड़की द्वारा अपने लड़के दोस्त का यह प्रस्ताव मान लेना ही काफी नहीं है कि वह उसके साथ डेट पर जाने को तैयार है। यूँ तो किसी भी रिश्ते की यह पहली बड़ी सफलता मानी जाएगी पर इसे बहुत ही संकट का समय भी माना जाएगा। अगर युवती किन्हीं कारणों से अपने मित्र से प्रभावित नहीं हुई तो इस रिश्ते को यहीं पर पूर्ण विराम लग सकता है। पहली डेटिंग ही अंतिम डेटिंग बन सकती है।
लड़कों का डरना और दुविधा में रहना भी स्वाभाविक है। यूँ तो लड़के और लड़कियाँ मनुष्य ही हैं पर अलग माहौल में परवरिश के कारण दोनों के सोचने-समझने का तरीका भिन्न होता है। इसी वजह से दोनों ही कई बार नए माहौल में सशंकित से रहते हैं। अधिकतर मामले में पहली डेट पर पूरी जिम्मेदारी लड़कों की हो जाती है कि वह कैसे उस शाम या समय को खुशगवार बनाए रखें।
सबसे पहला संकट यह आता है कि आखिर बात कहाँ से शुरू की जाए। ऐसे वाक्य से संवाद शुरू करना चाहिए जो ज्यादा भारी-भरकम न हों और जवाब देने वाले को भी कोई जोखिम महसूस न हो। जैसे, 'आज का दिन कैसा बीता?' बहुत ही उचित प्रश्न है उस मौके के लिए। इस बात पर वह आसानी से बात शुरू कर सकती है और बहुत कुछ बताने को हो भी सकता है। माहौल सहज करने के लिए ऐसा प्रश्न करना और फिर धैर्य से पूरा जवाब सुनने के बाद थोड़ा अपना अनुभव भी बताना अनुकूल हो सकता है।
अब आप थोड़ा निजीपन की ओर बढ़ सकते हैं। संभ्रांत और सौम्य आवाज और भाषा में अपनी डेट की पोशाक के चयन की सराहना कर सकते हैं। रंगों की तारीफ करते हुए आप हौले से बता सकते हैं कि यह उस पर फब रहा है। उनके पूरे गेटअप और केश सज्जा की भी प्रशंसा कर सकते हैं।
NDहो सकता है उन्होंने ऐसी जींस और टॉप पहनी हो जो आपकी निगाह में उतना अच्छा न लग रहा हो फिर भी आपको उसकी तारीफ ही करनी चाहिए। आपकी यह प्रशंसा उन्हें आश्वस्त और सहज कर देगी। यह पूरी बातचीत इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस पहली डेट के लिए उसने अतिरिक्त कोशिश की है।
सजने-संवरने में समय लगाया है। वैसे तो आपने भी तैयार होने में मेहनत की है और आपको उसकी दाद भी जरूर मिलेगी। कई बार लड़कियाँ ऐसी बातों में पहल करने से कतराती हैं लेकिन सहज और सही माहौल मिलने पर बहुत ही आसानी से ऐसी बातों में हिस्सा ले सकती हैं।
खाने-पीने के बीच ही उसकी पसंद के खाने पर जानते हुए बोलना चाहिए, 'सच यह बहुत ही प्यारा समय है मेरे लिए, इतना खूबसूरत लम्हा बीतेगा, इतना अच्छा लगेगा मिलकर बैठने पर यह मैंने नहीं सोचा था।' ऐसी बातों से आपकी 'डेट' बहुत खुश होगी। और अब आप किसी अन्य विषय पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। यहाँ लड़कों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमूमन लड़के, लड़कियों को कम अक्लमंद समझते हैं पर यह विचार बहुत ही खतरनाक है, इसे भाँपते ही आपकी 'डेट' आपसे दूर हो जाएगी।
कई लड़कियाँ इतनी हाजिरजवाब और जहीन होती हैं कि आपकी पुरुषवादी सोच को जानते ही आपको अलविदा कह देंगी और आपका मजाक भी उड़ाएँगी। इसलिए संवाद बनाते समय अपनी डेट को भी अपने बराबर ही समझें। विषय पर बात करते समय यदि नया नजरिया सामने आता है तो उसे सराहें और बताएँ कि यह दृष्टिकोण बिल्कुल नया है।
अगर अहं को सामने रखकर आप असहज होने लगेंगे और तारीफ करने से मैं छोटा हो जाऊँगा, ऐसा समझेंगे तो यह मान लें कि रिश्ता हाथ से गया। तारीफ में हमेशा सच्चाई झलकनी चाहिए। बनावटीपन से काम नहीं बनता। आपकी डेट को भी सच और ढोंग का अहसास हो जाएगा।
इस पूरी बातचीत का आधार यह होना चाहिए कि आप दोनों ज्यादा सहज हों, अच्छा महसूस करें, एक दूसरे के बारे में थोड़ी निजी बातें भी जान पाएँ। इसे बिलकुल परीक्षा वाला समय नहीं बना देना चाहिए। बहुत ज्यादा निजी सवाल भी नहीं करना चाहिए। अगर आपने सावधानी के साथ यह पहली डेट पार कर ली तो निश्चित ही अगली कई डेट आपकी होंगी।
युवती दोस्त के साथ कई लोगों के बीच बातचीत करना, हँसी-मजाक करना और थोड़ा रूमानियत का अहसास करना एक बात है लेकिन उसी के साथ एकांत में संवाद बनाना बिल्कुल अलग।
किसी लड़की द्वारा अपने लड़के दोस्त का यह प्रस्ताव मान लेना ही काफी नहीं है कि वह उसके साथ डेट पर जाने को तैयार है। यूँ तो किसी भी रिश्ते की यह पहली बड़ी सफलता मानी जाएगी पर इसे बहुत ही संकट का समय भी माना जाएगा। अगर युवती किन्हीं कारणों से अपने मित्र से प्रभावित नहीं हुई तो इस रिश्ते को यहीं पर पूर्ण विराम लग सकता है। पहली डेटिंग ही अंतिम डेटिंग बन सकती है।
लड़कों का डरना और दुविधा में रहना भी स्वाभाविक है। यूँ तो लड़के और लड़कियाँ मनुष्य ही हैं पर अलग माहौल में परवरिश के कारण दोनों के सोचने-समझने का तरीका भिन्न होता है। इसी वजह से दोनों ही कई बार नए माहौल में सशंकित से रहते हैं। अधिकतर मामले में पहली डेट पर पूरी जिम्मेदारी लड़कों की हो जाती है कि वह कैसे उस शाम या समय को खुशगवार बनाए रखें।
सबसे पहला संकट यह आता है कि आखिर बात कहाँ से शुरू की जाए। ऐसे वाक्य से संवाद शुरू करना चाहिए जो ज्यादा भारी-भरकम न हों और जवाब देने वाले को भी कोई जोखिम महसूस न हो। जैसे, 'आज का दिन कैसा बीता?' बहुत ही उचित प्रश्न है उस मौके के लिए। इस बात पर वह आसानी से बात शुरू कर सकती है और बहुत कुछ बताने को हो भी सकता है। माहौल सहज करने के लिए ऐसा प्रश्न करना और फिर धैर्य से पूरा जवाब सुनने के बाद थोड़ा अपना अनुभव भी बताना अनुकूल हो सकता है।
अब आप थोड़ा निजीपन की ओर बढ़ सकते हैं। संभ्रांत और सौम्य आवाज और भाषा में अपनी डेट की पोशाक के चयन की सराहना कर सकते हैं। रंगों की तारीफ करते हुए आप हौले से बता सकते हैं कि यह उस पर फब रहा है। उनके पूरे गेटअप और केश सज्जा की भी प्रशंसा कर सकते हैं।
NDहो सकता है उन्होंने ऐसी जींस और टॉप पहनी हो जो आपकी निगाह में उतना अच्छा न लग रहा हो फिर भी आपको उसकी तारीफ ही करनी चाहिए। आपकी यह प्रशंसा उन्हें आश्वस्त और सहज कर देगी। यह पूरी बातचीत इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस पहली डेट के लिए उसने अतिरिक्त कोशिश की है।
सजने-संवरने में समय लगाया है। वैसे तो आपने भी तैयार होने में मेहनत की है और आपको उसकी दाद भी जरूर मिलेगी। कई बार लड़कियाँ ऐसी बातों में पहल करने से कतराती हैं लेकिन सहज और सही माहौल मिलने पर बहुत ही आसानी से ऐसी बातों में हिस्सा ले सकती हैं।
खाने-पीने के बीच ही उसकी पसंद के खाने पर जानते हुए बोलना चाहिए, 'सच यह बहुत ही प्यारा समय है मेरे लिए, इतना खूबसूरत लम्हा बीतेगा, इतना अच्छा लगेगा मिलकर बैठने पर यह मैंने नहीं सोचा था।' ऐसी बातों से आपकी 'डेट' बहुत खुश होगी। और अब आप किसी अन्य विषय पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। यहाँ लड़कों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमूमन लड़के, लड़कियों को कम अक्लमंद समझते हैं पर यह विचार बहुत ही खतरनाक है, इसे भाँपते ही आपकी 'डेट' आपसे दूर हो जाएगी।
कई लड़कियाँ इतनी हाजिरजवाब और जहीन होती हैं कि आपकी पुरुषवादी सोच को जानते ही आपको अलविदा कह देंगी और आपका मजाक भी उड़ाएँगी। इसलिए संवाद बनाते समय अपनी डेट को भी अपने बराबर ही समझें। विषय पर बात करते समय यदि नया नजरिया सामने आता है तो उसे सराहें और बताएँ कि यह दृष्टिकोण बिल्कुल नया है।
अगर अहं को सामने रखकर आप असहज होने लगेंगे और तारीफ करने से मैं छोटा हो जाऊँगा, ऐसा समझेंगे तो यह मान लें कि रिश्ता हाथ से गया। तारीफ में हमेशा सच्चाई झलकनी चाहिए। बनावटीपन से काम नहीं बनता। आपकी डेट को भी सच और ढोंग का अहसास हो जाएगा।
इस पूरी बातचीत का आधार यह होना चाहिए कि आप दोनों ज्यादा सहज हों, अच्छा महसूस करें, एक दूसरे के बारे में थोड़ी निजी बातें भी जान पाएँ। इसे बिलकुल परीक्षा वाला समय नहीं बना देना चाहिए। बहुत ज्यादा निजी सवाल भी नहीं करना चाहिए। अगर आपने सावधानी के साथ यह पहली डेट पार कर ली तो निश्चित ही अगली कई डेट आपकी होंगी।
अब हँस भी दो....
अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर मुस्कान देखना चाहते हैं तो हम बताते हैं उसके लिए कुछ टिप्स, जिससे आपकी वो खुश हो जाएँगी और उनकी खुशी से बढ़कर आपको और क्या चाहिए? तो लीजिए -
* उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें।
* प्यार से उनके सिर को चूमें।
* नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ।
* उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।
* अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है।
* उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
* कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो।
* उनके दोस्तों के साथ भी कुछ समय बिताएँ।
* अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
* उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उन्हें सुकून मिलेगा।
* कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, तकिये जैसी हल्की-फुल्की चीजों को पूरी ताकत से दे मारें।
* पार्क में लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें।
* हँसाने के एसएमएस या फिल्मी डायलॉग जो उनकी जानकारी में न हों, उन्हें सुना दें और कहें मेरी ही उपज हैं। मीठा और प्यारा सा झूठ तो चल ही जाएगा न!
* रात को कोशिश करें कि प्रत्येक घंटे में एक बार उन्हें मिस्ड कॉल दें। कितने घंटों आप उनकी याद में जागे और मिस किया उन्हें पता चलेगा।
* जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें।
* उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ।
* उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
* अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।
* एक और जरूरी चीज। लगभग हर चार घंटे में यानी दिनभर में 2-3 बार उनके किसी न किसी काम की तारीफ करें। ड्रेस अच्छी है या मुझे यह अदा तुम्हारी बहुत पसंद है। सराहना का हर कोई मुरीद होता है।
* कभी ख्यालों में डूबी दिखें तो ठान कर बैठ जाएँ क्या सोच रही थीं बताओ। थोड़ी ना-नुकुर के बाद वह बता भी देंगी।
* उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
* आपकी जो तस्वीर उन्हें पसंद हो उन्हें जरूर दें।
* उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें।
* प्यार से उनके सिर को चूमें।
* नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ।
* उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।
* अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है।
* उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
* कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो।
* उनके दोस्तों के साथ भी कुछ समय बिताएँ।
* अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
* उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उन्हें सुकून मिलेगा।
* कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, तकिये जैसी हल्की-फुल्की चीजों को पूरी ताकत से दे मारें।
* पार्क में लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें।
* हँसाने के एसएमएस या फिल्मी डायलॉग जो उनकी जानकारी में न हों, उन्हें सुना दें और कहें मेरी ही उपज हैं। मीठा और प्यारा सा झूठ तो चल ही जाएगा न!
* रात को कोशिश करें कि प्रत्येक घंटे में एक बार उन्हें मिस्ड कॉल दें। कितने घंटों आप उनकी याद में जागे और मिस किया उन्हें पता चलेगा।
* जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें।
* उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ।
* उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
* अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।
* एक और जरूरी चीज। लगभग हर चार घंटे में यानी दिनभर में 2-3 बार उनके किसी न किसी काम की तारीफ करें। ड्रेस अच्छी है या मुझे यह अदा तुम्हारी बहुत पसंद है। सराहना का हर कोई मुरीद होता है।
* कभी ख्यालों में डूबी दिखें तो ठान कर बैठ जाएँ क्या सोच रही थीं बताओ। थोड़ी ना-नुकुर के बाद वह बता भी देंगी।
* उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
* आपकी जो तस्वीर उन्हें पसंद हो उन्हें जरूर दें।
जरूरी है एक छोटा-सा थैंक्स शुक्रिया से बढ़ता है प्यार
हेलो दोस्तो! हर किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता.. क्या यह सोचकर हमेशा उदास रहना चाहिए? नहीं। अगर हमने अधूरेपन को ही अपनी सोच का आधार बना लिया तो खुशी हमें दूर-दूर तक नजर नहीं आएगी। हम अवसाद में डूबते जाएँगे। हमारे जीने का उत्साह ही खत्म हो जाएगा। जीवन में खुशियाँ भरने के लिए प्यार से भरे हुए जो भी पल आपके हाथ लगते हैं उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए।
अपने साथी के हर सहयोग, आपको खुश करने की हर कोशिश, अपनी व्यस्तता और मजबूरियों के बीच साथ देने और समय निकालने के हर प्रयास का तहे दिल से धन्यवाद करना चाहिए। शुक्रिया अदा करना बहुत ही प्यारा लव मंत्र है। इससे मिलने वाली खुशी हजार गुना बढ़ जाती है और प्यार पर भरोसा बढ़ता जाता है।
प्यार का एक ही धर्म है खुशी देना। इस मजहब में केवल अच्छे गुणों की ही गुंजाइश है। आप ही बताएँ यदि प्यार करने वाले आपस में ईर्ष्या करने लगें, प्रतिस्पर्धा करने लगें, एक दूसरे को नीचा दिखाने लगें, वर्ग भेद और ऊँच-नीच का अहसास कराने लगें, अहम दिखाने लगें, उम्र एवं पद का धौंस महसूस कराने लगें तो वह प्यार टिक सकता है?
NDप्यार तो दूर की चीज है, ऐसी नकारात्मक भावना से साधारण पसंद भी समाप्त हो जाएगी। नकारात्मक गुणों को आपस में पालते हुए भी यदि कोई प्रेमी युगल बने हुए हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें बस जीवन साथ बिताने की कोई मजबूरी है। न सखा भाव है, न ही एक-दूसरे के लिए कोई हमदर्दी। क्या बिना त्याग, करूणा और हमदर्दी के कोई प्रेम मुमकिन है। इसलिए अपने साथी से प्रदर्शित किया गया मामूली सा त्याग, हल्की सी करुणा और थोड़ी सी हमदर्दी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करें। यकीन मानिए आपको लगेगा कि आपको दोनों जहाँ मिल गया है।
अपने साथी की हर अच्छी अदाओं और गुणों पर वारा जाऊँ या वारी जाऊँ वाली भावना से प्यार के रिश्ते में चार चाँद लग जाते हैं। प्यार कोई करता ही इसलिए है कि वह जीवन में जीने का अहसास लाए। जीने की भावना जगाने के लिए अच्छी सोच की जरूरत होती है। उम्मीद की जरूरत है। अपने प्यार पर भरोसे की जरूरत है। यह तभी संभव है जब हम अपने साथी की हर छोटी-बड़ी कोशिश को सराहें। उसे उसके प्रयास को इंगित करके दिखाएँ।
अपने प्यार के साथ शुरू की गई यह आदत और व्यवहार धीरे-धीरे तमाम परिस्थितियों से निपटने का हौसला देगा। एक बार हालात को, व्यक्तियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने और तोलने की आदत जीवन में कामयाबी की ओर ले जाएगा।
आप ही बताएँ अपने बॉस, शिक्षक, माँ-बाप, भाई-बहन, अन्य रिश्तेदार या दोस्त-अहबाब को आप उनके किसी सहयोग पर धन्यवाद व्यक्त करते हैं, उनका चेहरा कितना खिल उठता है। सख्त से सख्त व्यक्ति भी कोमलता से भर उठता है। इतना ही नहीं इसका असर और भी गहरा होता है। वह असर आगे फिर आपके लिए उससे भी बेहतर कुछ करने का मौका देगा।
NDशुक्रिया, केवल औपचारिकता के लिए नहीं करना चाहिए। उसे दिल से महसूस करके करें तो उसकी ताकत आपको भी महसूस होगी। आपको शारीरिक तौर पर भी इसका लाभ मिलेगा। सकारात्मक सोच आते ही हमारे सारे ग्लैंड सही काम करने लगते हैं। यह आपके अंदर आत्मविश्वास भी जगाता है। यदि एक मरीज को अपने डॉक्टर पर ही भरोसा न हो तो उस डॉक्टर का काम ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
पर अगर डॉक्टर के प्रयास से आपको थोड़ी भी राहत मिली हो और आप उसको, उस प्रयास का धन्यवाद करते हैं तो डॉक्टर भी अपनी पूरी विधा और तजुर्बे को अपने दिमाग में समेटकर आपका इलाज करने की कोशिश करेगा। यदि आपने यह भावना दिखाई कि बस दस प्रतिशत तो ठीक हुआ है...आप क्या इलाज कर रहे हैं... तो वह आपका इलाज तो करेगा पर उसका व्यक्तिगत प्रयास लुप्त हो जाएगा।
उसी प्रकार प्यार करने वाले को भी उसके प्रयास की विशेष पहचान की जरूरत पड़ती है। जिसने आपके लिए कुछ भी किया है उसका एक ही तरीका है बताने का और वह है, शुक्रिया अदा करना। मजे की बात यह है कि औपचारिक रूप से बोला गया यह शब्द भी बेअसर नहीं जाता है। दिल से धन्यवाद करें तो दुनिया आपकी है।
अपने साथी के हर सहयोग, आपको खुश करने की हर कोशिश, अपनी व्यस्तता और मजबूरियों के बीच साथ देने और समय निकालने के हर प्रयास का तहे दिल से धन्यवाद करना चाहिए। शुक्रिया अदा करना बहुत ही प्यारा लव मंत्र है। इससे मिलने वाली खुशी हजार गुना बढ़ जाती है और प्यार पर भरोसा बढ़ता जाता है।
प्यार का एक ही धर्म है खुशी देना। इस मजहब में केवल अच्छे गुणों की ही गुंजाइश है। आप ही बताएँ यदि प्यार करने वाले आपस में ईर्ष्या करने लगें, प्रतिस्पर्धा करने लगें, एक दूसरे को नीचा दिखाने लगें, वर्ग भेद और ऊँच-नीच का अहसास कराने लगें, अहम दिखाने लगें, उम्र एवं पद का धौंस महसूस कराने लगें तो वह प्यार टिक सकता है?
NDप्यार तो दूर की चीज है, ऐसी नकारात्मक भावना से साधारण पसंद भी समाप्त हो जाएगी। नकारात्मक गुणों को आपस में पालते हुए भी यदि कोई प्रेमी युगल बने हुए हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें बस जीवन साथ बिताने की कोई मजबूरी है। न सखा भाव है, न ही एक-दूसरे के लिए कोई हमदर्दी। क्या बिना त्याग, करूणा और हमदर्दी के कोई प्रेम मुमकिन है। इसलिए अपने साथी से प्रदर्शित किया गया मामूली सा त्याग, हल्की सी करुणा और थोड़ी सी हमदर्दी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करें। यकीन मानिए आपको लगेगा कि आपको दोनों जहाँ मिल गया है।
अपने साथी की हर अच्छी अदाओं और गुणों पर वारा जाऊँ या वारी जाऊँ वाली भावना से प्यार के रिश्ते में चार चाँद लग जाते हैं। प्यार कोई करता ही इसलिए है कि वह जीवन में जीने का अहसास लाए। जीने की भावना जगाने के लिए अच्छी सोच की जरूरत होती है। उम्मीद की जरूरत है। अपने प्यार पर भरोसे की जरूरत है। यह तभी संभव है जब हम अपने साथी की हर छोटी-बड़ी कोशिश को सराहें। उसे उसके प्रयास को इंगित करके दिखाएँ।
अपने प्यार के साथ शुरू की गई यह आदत और व्यवहार धीरे-धीरे तमाम परिस्थितियों से निपटने का हौसला देगा। एक बार हालात को, व्यक्तियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने और तोलने की आदत जीवन में कामयाबी की ओर ले जाएगा।
आप ही बताएँ अपने बॉस, शिक्षक, माँ-बाप, भाई-बहन, अन्य रिश्तेदार या दोस्त-अहबाब को आप उनके किसी सहयोग पर धन्यवाद व्यक्त करते हैं, उनका चेहरा कितना खिल उठता है। सख्त से सख्त व्यक्ति भी कोमलता से भर उठता है। इतना ही नहीं इसका असर और भी गहरा होता है। वह असर आगे फिर आपके लिए उससे भी बेहतर कुछ करने का मौका देगा।
NDशुक्रिया, केवल औपचारिकता के लिए नहीं करना चाहिए। उसे दिल से महसूस करके करें तो उसकी ताकत आपको भी महसूस होगी। आपको शारीरिक तौर पर भी इसका लाभ मिलेगा। सकारात्मक सोच आते ही हमारे सारे ग्लैंड सही काम करने लगते हैं। यह आपके अंदर आत्मविश्वास भी जगाता है। यदि एक मरीज को अपने डॉक्टर पर ही भरोसा न हो तो उस डॉक्टर का काम ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
पर अगर डॉक्टर के प्रयास से आपको थोड़ी भी राहत मिली हो और आप उसको, उस प्रयास का धन्यवाद करते हैं तो डॉक्टर भी अपनी पूरी विधा और तजुर्बे को अपने दिमाग में समेटकर आपका इलाज करने की कोशिश करेगा। यदि आपने यह भावना दिखाई कि बस दस प्रतिशत तो ठीक हुआ है...आप क्या इलाज कर रहे हैं... तो वह आपका इलाज तो करेगा पर उसका व्यक्तिगत प्रयास लुप्त हो जाएगा।
उसी प्रकार प्यार करने वाले को भी उसके प्रयास की विशेष पहचान की जरूरत पड़ती है। जिसने आपके लिए कुछ भी किया है उसका एक ही तरीका है बताने का और वह है, शुक्रिया अदा करना। मजे की बात यह है कि औपचारिक रूप से बोला गया यह शब्द भी बेअसर नहीं जाता है। दिल से धन्यवाद करें तो दुनिया आपकी है।
हाँ, तुम बिल्कुल वैसी हो...!
क्या आप जानती हैं- पुरुष जब प्रेम करते हैं तो वे स्त्री से क्या चाहते हैं? बहुत सारे लोग शायद उसकी चाहत का अर्थ शारीरिक संबंधों से आगे न लगा पाएँ। यह सही है कि बहुत से पुरुष संबंधों के मामले में संकोची होते हैं और वे चाहते हैं कि जो कुछ हो वह स्त्री की तरफ से ही किया जाए। यह सिर्फ इसलिए होता है कि इससे पुरुष को स्त्री के साथ अपने संबंध मजबूत और ईमानदार बनाने में मदद मिलती है। जो बातें वह स्त्री से कर सकता है वह किसी और से शायद नहीं कर सकता।
खासतौर से जब पुरुष किसी स्त्री से प्यार करता है या शुरुआत करता है तो वह चाहता है कि स्त्री बिना कुछ कहे ही उसकी इमोशन्स और थॉट्स को जान और समझ ले ताकि पुरुष भविष्य में उससे अपने मन की अनकही बातें भी कह सके। आखिर प्रेम में पड़े पुरुष क्या सोचते हैं और वे क्या बन जाते हैं?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इसे समझना एक टेढ़ी खीर है पर कोशिश की जाए तो कुछ हद तक प्रेम के प्रति पुरुषों का नजरिया समझा जा सकता है।
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक गीतिका कपूर कहती हैं- जब कोई व्यक्ति प्रेम में पड़ता है तो संबंधों को लेकर उसमें एक अलग तरह का कॉन्फिडेंस आ जाता है। वह खुद को दूसरों से प्रेम करने वाला और संयमी महसूस करने लगता है। तब दरअसल पुरुष जिस स्त्री से विवाह करता है वह उससे कई मुलाकातों, डेटिंग और दूसरों से सर्वश्रेष्ठ मानने के बाद ही जुड़ता है। इस तरह की फीलिंग्स उसे जीवन के प्रति एटिट्यूड को बदलने और विभिन्न आयामों को समझने में भी मददगार साबित होती हैं। इसलिए वह अपने आपको इस तरह तैयार करता है कि दूसरे भी उससे इन्सपायर हों।
छः माह पहले ही लव मैरिज करने वाले विनीत चोपड़ा कहते हैं- यह प्रेम का पॉजीटिव साइड है जो पुरुष दूसरों को बता सकता है। कुछ लोगों के लिए प्रेम जीवन में अहंकार को बढ़ाने वाला भी साबित होता है। वरिष्ठ मनोचिकित्सक संदीप वोरा मानते हैं कि यह रवैया दरअसल पुरुष में स्वयं को बेहतर मानने के कारण पैदा होता है।
PRबहुत से लोग संबंधों को सिर्फ मौजमस्ती और समय काटने का रास्ता मानते हैं लेकिन कई पुरुष इन्हीं संबंधों के जरिए अपने जीवन में खुशी और उल्लास भी समेट लेते हैं। उनके लिए अपनी पत्नी या महिला मित्र की मुस्कान या आवाज ही उनके लिए सम्मान और पुरस्कार की तरह होती है। एक कंपनी में व्यवसाय प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाली शाहना कहती हैं- 'इसलिए मैं हमेशा अपने पुरुष मित्र के साथ मुस्कराकर मिलती हूँ। वे मानती हैं कि इससे जीवन में फ्रेशनेस बनी रहती है। वह रोज खुद में एक नयापन ढूँढता है।'
एक युवा प्रेमी विकास चतुर्वेदी कहते हैं- दुनिया में मेरे लिए 'उसका' स्माइली फेस ही सब कुछ है। मैं जानता हूँ कि वह मुझे बहुत चाहती है इसलिए मैं उसे खुश रखने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। जब वह मुझसे अपनी कोई प्रॉब्लम शेयर करती है तो वह मेरे लिए अद्भुत पल होता है।'
गीतिका कहती हैं- करियर संबंधी मामलों में भी पुरुष चाहते हैं कि कोई योग्य महिला उनकी सहयोगी बने। उनमें अपनी योग्यता को उनसे बाँटने की चाह होती है। ऐसा होने पर पुरुष खुद को लकी फील करते हैं। लेकिन आमतौर पर महिलाएँ इस नजरिए को जानते हुए भी अनजान बनी रहती हैं जिससे पुरुष अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं।
खासतौर से यौन संबंधों में भी महिलाएँ अपनी इच्छाओं का खुलासा नहीं करतीं जबकि पुरुष चाहते हैं कि स्त्री उनके साथ भी उसी तरह से रिएक्ट करें। सेक्स, संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संदीप वोरा कहते हैं- इससे संबंध मजबूत और नए बने रहते हैं, लेकिन कुछ पुरुषों के लिए सिर्फ यही प्रेम का अर्थ होता है। हालाँकि शारीरिक संबंधों के बगैर भी प्रेम का अर्थ अधूरा ही होता है।
NDगौर से देखा जाए तो पुरुषों में तीव्र इच्छा रहती है कि वे जो कुछ अपने जीवन में या दिनभर में करते हैं उसे उनकी सहयोगी मित्र, गर्लफ्रेंड या पत्नी देखे और सराहे। यही नहीं बल्कि उन्हें सहयोग भी करे।
गीतिका कहती हैं कि इससे पुरुष को करेज मिलता है। वह ढंग से विकसित होता है। यह जीवन को संतुलित और मजबूत बनाता है। लेकिन जहाँ पुरुष अकेले होते हैं वहाँ संबंधों में ही नहीं उनके करियर में भी असंतुलन आ जाता है। इसलिए बहुत से पुरुष कभी-कभी बहुत ही कॉम्पीटिटिव पाए जाते हैं।
संदीप वोरा कहते हैं- इसलिए पुरुष हमेशा किसी ऐसे साथी की तलाश में रहते हैं जो उन्हें मानसिक और संवेदनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ भावनात्मक सुरक्षा भी दे सके। समझदार महिलाओं को इसमें पुरुषों की मदद करनी चाहिए।
खासतौर से जब पुरुष किसी स्त्री से प्यार करता है या शुरुआत करता है तो वह चाहता है कि स्त्री बिना कुछ कहे ही उसकी इमोशन्स और थॉट्स को जान और समझ ले ताकि पुरुष भविष्य में उससे अपने मन की अनकही बातें भी कह सके। आखिर प्रेम में पड़े पुरुष क्या सोचते हैं और वे क्या बन जाते हैं?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इसे समझना एक टेढ़ी खीर है पर कोशिश की जाए तो कुछ हद तक प्रेम के प्रति पुरुषों का नजरिया समझा जा सकता है।
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक गीतिका कपूर कहती हैं- जब कोई व्यक्ति प्रेम में पड़ता है तो संबंधों को लेकर उसमें एक अलग तरह का कॉन्फिडेंस आ जाता है। वह खुद को दूसरों से प्रेम करने वाला और संयमी महसूस करने लगता है। तब दरअसल पुरुष जिस स्त्री से विवाह करता है वह उससे कई मुलाकातों, डेटिंग और दूसरों से सर्वश्रेष्ठ मानने के बाद ही जुड़ता है। इस तरह की फीलिंग्स उसे जीवन के प्रति एटिट्यूड को बदलने और विभिन्न आयामों को समझने में भी मददगार साबित होती हैं। इसलिए वह अपने आपको इस तरह तैयार करता है कि दूसरे भी उससे इन्सपायर हों।
छः माह पहले ही लव मैरिज करने वाले विनीत चोपड़ा कहते हैं- यह प्रेम का पॉजीटिव साइड है जो पुरुष दूसरों को बता सकता है। कुछ लोगों के लिए प्रेम जीवन में अहंकार को बढ़ाने वाला भी साबित होता है। वरिष्ठ मनोचिकित्सक संदीप वोरा मानते हैं कि यह रवैया दरअसल पुरुष में स्वयं को बेहतर मानने के कारण पैदा होता है।
PRबहुत से लोग संबंधों को सिर्फ मौजमस्ती और समय काटने का रास्ता मानते हैं लेकिन कई पुरुष इन्हीं संबंधों के जरिए अपने जीवन में खुशी और उल्लास भी समेट लेते हैं। उनके लिए अपनी पत्नी या महिला मित्र की मुस्कान या आवाज ही उनके लिए सम्मान और पुरस्कार की तरह होती है। एक कंपनी में व्यवसाय प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाली शाहना कहती हैं- 'इसलिए मैं हमेशा अपने पुरुष मित्र के साथ मुस्कराकर मिलती हूँ। वे मानती हैं कि इससे जीवन में फ्रेशनेस बनी रहती है। वह रोज खुद में एक नयापन ढूँढता है।'
एक युवा प्रेमी विकास चतुर्वेदी कहते हैं- दुनिया में मेरे लिए 'उसका' स्माइली फेस ही सब कुछ है। मैं जानता हूँ कि वह मुझे बहुत चाहती है इसलिए मैं उसे खुश रखने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। जब वह मुझसे अपनी कोई प्रॉब्लम शेयर करती है तो वह मेरे लिए अद्भुत पल होता है।'
गीतिका कहती हैं- करियर संबंधी मामलों में भी पुरुष चाहते हैं कि कोई योग्य महिला उनकी सहयोगी बने। उनमें अपनी योग्यता को उनसे बाँटने की चाह होती है। ऐसा होने पर पुरुष खुद को लकी फील करते हैं। लेकिन आमतौर पर महिलाएँ इस नजरिए को जानते हुए भी अनजान बनी रहती हैं जिससे पुरुष अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं।
खासतौर से यौन संबंधों में भी महिलाएँ अपनी इच्छाओं का खुलासा नहीं करतीं जबकि पुरुष चाहते हैं कि स्त्री उनके साथ भी उसी तरह से रिएक्ट करें। सेक्स, संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संदीप वोरा कहते हैं- इससे संबंध मजबूत और नए बने रहते हैं, लेकिन कुछ पुरुषों के लिए सिर्फ यही प्रेम का अर्थ होता है। हालाँकि शारीरिक संबंधों के बगैर भी प्रेम का अर्थ अधूरा ही होता है।
NDगौर से देखा जाए तो पुरुषों में तीव्र इच्छा रहती है कि वे जो कुछ अपने जीवन में या दिनभर में करते हैं उसे उनकी सहयोगी मित्र, गर्लफ्रेंड या पत्नी देखे और सराहे। यही नहीं बल्कि उन्हें सहयोग भी करे।
गीतिका कहती हैं कि इससे पुरुष को करेज मिलता है। वह ढंग से विकसित होता है। यह जीवन को संतुलित और मजबूत बनाता है। लेकिन जहाँ पुरुष अकेले होते हैं वहाँ संबंधों में ही नहीं उनके करियर में भी असंतुलन आ जाता है। इसलिए बहुत से पुरुष कभी-कभी बहुत ही कॉम्पीटिटिव पाए जाते हैं।
संदीप वोरा कहते हैं- इसलिए पुरुष हमेशा किसी ऐसे साथी की तलाश में रहते हैं जो उन्हें मानसिक और संवेदनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ भावनात्मक सुरक्षा भी दे सके। समझदार महिलाओं को इसमें पुरुषों की मदद करनी चाहिए।
'तू-तू-मैं-मैं' में प्यार का तड़का
अक्सर ऐसा होता है कि आप अपने साथी से किसी भी बात पर गुस्सा हो जाते हैं। कभी वह टाइम पर नहीं आ सके, या आपके विचार मेल नहीं खाए आदि कई कारण हैं जिन पर आपका क्रोधित होना स्वाभाविक है। आप अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाते।
यदि वह हमसे नाराज हैं तो इसको छिपाने की आवश्यकता नहीं। यदि वह हम पर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे हमसे नफरत करते हैं। सच तो यह है कि क्रोध भी प्रेम की अभिव्यक्ति का एक प्रकार है।
क्रोध या गुस्सा सामान्यत: एक अवगुण है जो थोड़ा बहुत सब में होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई आवश्यकता से अधिक गुस्सा करता है तो कोई कम। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें गुस्सा जरूर आता है, लेकिन वे उसे व्यक्त नहीं करते। ऐसा कभी आदतवश होता है और कभी विवशता के कारण।
पर यह सत्य है कि हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी बात पर गुस्सा आता ही है, क्योंकि अन्य अनुभूतियों की तरह यह भी एक अनुभूति है। अक्सर लोग जब अपना क्रोध उस आदमी पर व्यक्त नहीं कर पाते, जिस पर वे करना चाहते हैं तब वे अपना गुस्सा दूसरी चीजों पर निकालते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि क्रोध के आवेग में किसी चीज को उठाकर फेंकने से या मारने से मनुष्य के अंदर की भड़ास निकल जाती है तथा उसके जल्दी शांत हो जाने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
इसके विपरीत कुछ लोगों को गुस्सा करने की आदत पड़ जाती है जिससे वे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। गुस्सा दबाना या उसे अभिव्यक्त न करना शुरू में किसी विवशता के कारण होता है, जो क्रमश: आदत का रूप ले लेता है। सच तो यह है कि क्रोध की आग बुझती नहीं वरन अंदर ही अंदर सुलगती रहती है।
इस कारण अक्सर लोग खासकर युवा भयंकर निराशा का शिकार हो जाते हैं और नशीली चीजों के सेवन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। गुस्सा दबाने का असर हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ता है।
गुस्सा व्यक्त करते समय ध्यान दें कि आपकी आवाज किस प्रकार बदल रही है। सामने बैठे व्यक्ति से यह न कहें, 'तुमने मेरे साथ ऐसा किया' क्योंकि ऐसा कहने से आप उसे अपने गुस्से के विषय में बता रहे हैं, न कि अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं। इसके बजाय कहें 'मैं तुमसे नाराज हूँ' या 'मैं तुमसे नफरत करती हूँ 'या मुझे तुम्हारे पर इतना ज्यादा गुस्सा आता है क्योंकि तुमने मेरे साथ ऐसा-वैसा किया।'
नकारात्मक भावनाओं को जिस प्रकार अनुभव किया जाता है, यदि उसी रूप में अभिव्यक्त ना किया जाए तो इसके हानिकारक परिणामों से बचा जा सकता है।
ND* आप यह जरूर ध्यान रखें कि जिस बात से आप दोनों के बीच असहमति बनी है बात उसी तक सीमित रहे। वहाँ से इसे डाइवर्ट कर कहीं ओर खींच कर न ले जाएँ नहीं तो समस्या कम होने की बजाय और बढ़ सकती है।
* अपने मनोभावों पर नियंत्रण रखें। अपने शब्द मर्यादा की सीमा में रखें और आपका उद्देश्य मतभेदों को दूर करना होना चाहिए।
* यदि आपके विचार से आपका साथी सहमत नहीं है तो फिर जबर्दस्ती उस पर अपने विचारों को थोपें नहीं। थोड़ा उस घड़ी को टालने का प्रयास करें। दिमाग शांत होगा तो ऑटोमैटिक ही कई इशूज रिजॉल्व हो जाएँगे।
* जहाँ तक संभव हो आप दोनों के अलावा तीसरे को बीच में न आने दें, लेकिन आवश्यक हो जाए तो विश्वसनीय दोस्त को मिडिएटर बनाने से भी परहेज न करें।
* बात को गाँठ न बाँध लें। जितनी जल्दी हो सके। आगे बढ़कर बात कर लें। जैसे खाना खाया कि नहीं या उनके ही किसी अन्य मित्र के बारे में पूछ लें। आपके फोन में भले ही बैलेंस हो लेकिन साथी का मोबाइल माँगकर यूज कर लें।
* सामने वाला जो काम कर रहा है। उसकी आगे बढ़कर हेल्प करने चले जाएँ।
दोस्तो, याद रखिए यही वह नाजुक समय होता है जबकि आप तलवार की धार पर खड़े होते हैं जिसके एक ओर कुआँ होता है और दूसरी ओर खाई। आपमें से किसी की भी गलती आगे के रिश्ते पर हो सकता है ब्रेक लगा दे।
क्योंकि बड़े-बड़े झगड़ों की शुरुआत ऐसे ही किसी छोटे बिंदुओं से होती है।
किसी ने ठीक ही कहा है कि यदि आपको आदमी का व्यवहार परखना हो तो आप देखिए कि उसके झगड़ा करने का ढंग क्या है। उस समय वह कितना शालीन बना रह सकता है या कितना अभद्र हो सकता है।
झगड़े में भी प्यार बना रहे तो इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता। गुस्सा करो तो भी ऐसे कि आपके अन्य दोस्त भी आपकी मिसाल दें कि देखो लड़ने-झगड़ने के बावजूद भी कब पहले जैसे हो जाते हैं पता ही नहीं चलता।
यदि वह हमसे नाराज हैं तो इसको छिपाने की आवश्यकता नहीं। यदि वह हम पर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे हमसे नफरत करते हैं। सच तो यह है कि क्रोध भी प्रेम की अभिव्यक्ति का एक प्रकार है।
क्रोध या गुस्सा सामान्यत: एक अवगुण है जो थोड़ा बहुत सब में होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई आवश्यकता से अधिक गुस्सा करता है तो कोई कम। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें गुस्सा जरूर आता है, लेकिन वे उसे व्यक्त नहीं करते। ऐसा कभी आदतवश होता है और कभी विवशता के कारण।
पर यह सत्य है कि हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी बात पर गुस्सा आता ही है, क्योंकि अन्य अनुभूतियों की तरह यह भी एक अनुभूति है। अक्सर लोग जब अपना क्रोध उस आदमी पर व्यक्त नहीं कर पाते, जिस पर वे करना चाहते हैं तब वे अपना गुस्सा दूसरी चीजों पर निकालते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि क्रोध के आवेग में किसी चीज को उठाकर फेंकने से या मारने से मनुष्य के अंदर की भड़ास निकल जाती है तथा उसके जल्दी शांत हो जाने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
इसके विपरीत कुछ लोगों को गुस्सा करने की आदत पड़ जाती है जिससे वे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। गुस्सा दबाना या उसे अभिव्यक्त न करना शुरू में किसी विवशता के कारण होता है, जो क्रमश: आदत का रूप ले लेता है। सच तो यह है कि क्रोध की आग बुझती नहीं वरन अंदर ही अंदर सुलगती रहती है।
इस कारण अक्सर लोग खासकर युवा भयंकर निराशा का शिकार हो जाते हैं और नशीली चीजों के सेवन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। गुस्सा दबाने का असर हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ता है।
गुस्सा व्यक्त करते समय ध्यान दें कि आपकी आवाज किस प्रकार बदल रही है। सामने बैठे व्यक्ति से यह न कहें, 'तुमने मेरे साथ ऐसा किया' क्योंकि ऐसा कहने से आप उसे अपने गुस्से के विषय में बता रहे हैं, न कि अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं। इसके बजाय कहें 'मैं तुमसे नाराज हूँ' या 'मैं तुमसे नफरत करती हूँ 'या मुझे तुम्हारे पर इतना ज्यादा गुस्सा आता है क्योंकि तुमने मेरे साथ ऐसा-वैसा किया।'
नकारात्मक भावनाओं को जिस प्रकार अनुभव किया जाता है, यदि उसी रूप में अभिव्यक्त ना किया जाए तो इसके हानिकारक परिणामों से बचा जा सकता है।
ND* आप यह जरूर ध्यान रखें कि जिस बात से आप दोनों के बीच असहमति बनी है बात उसी तक सीमित रहे। वहाँ से इसे डाइवर्ट कर कहीं ओर खींच कर न ले जाएँ नहीं तो समस्या कम होने की बजाय और बढ़ सकती है।
* अपने मनोभावों पर नियंत्रण रखें। अपने शब्द मर्यादा की सीमा में रखें और आपका उद्देश्य मतभेदों को दूर करना होना चाहिए।
* यदि आपके विचार से आपका साथी सहमत नहीं है तो फिर जबर्दस्ती उस पर अपने विचारों को थोपें नहीं। थोड़ा उस घड़ी को टालने का प्रयास करें। दिमाग शांत होगा तो ऑटोमैटिक ही कई इशूज रिजॉल्व हो जाएँगे।
* जहाँ तक संभव हो आप दोनों के अलावा तीसरे को बीच में न आने दें, लेकिन आवश्यक हो जाए तो विश्वसनीय दोस्त को मिडिएटर बनाने से भी परहेज न करें।
* बात को गाँठ न बाँध लें। जितनी जल्दी हो सके। आगे बढ़कर बात कर लें। जैसे खाना खाया कि नहीं या उनके ही किसी अन्य मित्र के बारे में पूछ लें। आपके फोन में भले ही बैलेंस हो लेकिन साथी का मोबाइल माँगकर यूज कर लें।
* सामने वाला जो काम कर रहा है। उसकी आगे बढ़कर हेल्प करने चले जाएँ।
दोस्तो, याद रखिए यही वह नाजुक समय होता है जबकि आप तलवार की धार पर खड़े होते हैं जिसके एक ओर कुआँ होता है और दूसरी ओर खाई। आपमें से किसी की भी गलती आगे के रिश्ते पर हो सकता है ब्रेक लगा दे।
क्योंकि बड़े-बड़े झगड़ों की शुरुआत ऐसे ही किसी छोटे बिंदुओं से होती है।
किसी ने ठीक ही कहा है कि यदि आपको आदमी का व्यवहार परखना हो तो आप देखिए कि उसके झगड़ा करने का ढंग क्या है। उस समय वह कितना शालीन बना रह सकता है या कितना अभद्र हो सकता है।
झगड़े में भी प्यार बना रहे तो इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता। गुस्सा करो तो भी ऐसे कि आपके अन्य दोस्त भी आपकी मिसाल दें कि देखो लड़ने-झगड़ने के बावजूद भी कब पहले जैसे हो जाते हैं पता ही नहीं चलता।
ऐसे जमाएँ इम्प्रेशन गर्लफ्रैंड पर
किसी भी युवती या महिला के सम्मुख अपनी छाप छोड़ने में कुछ पुरुष अनजाने में असफल हो जाते हैं। असल में अधिकांश महिलाएँ पुरुषों से मित्रता के मामले में एक मर्यादित, सभ्य तथा संतुलित व्यवहार चाहती हैं। यदि आपको ऐसा लगता है कि आप महिलाओं पर प्रभाव डालने में असफल साबित होते हैं तो आपको जरूरत होती है ऐसी ही कुछ बातों को अपनाने की।
क्या ऐसा होता है कि जब भी आप किसी युवती की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, वो पीछे हट जाती है। चेहरे-मोहरे से आप खासे अच्छे हैं। बढ़िया नौकरी से लगे हुए हैं। सबके साथ व्यवहार में भी मीठे हैं। फिर भी युवतियाँ हमेशा आपकी ओर से मुँह क्यों फेर लेती हैं?
न केवल आज, बल्कि कॉलेज के दिनों से ही ऐसा होता आया है। नहीं, यह भाग्य का खेल नहीं है। यह तो यथासंभव आपका अपना ही खेल है, जिसे स्वयं आपने बिगाड़ रखा है!
कहीं ऐसा तो नहीं कि...
* आप की साँसों में गंध है। खुद आपको इसका पता नहीं है। हो भी नहीं सकता। फौरन अपने डॉक्टर से मिलिए। असलियत वो ही बता सकेगा। छुटकारे के उपाय भी वो ही सुझाएगा। किसी भी उपाय की उपेक्षा मत करिए। रात को सोने से पहले ब्रश अवश्य कीजिए।
* गंध आपके वस्त्रों से भी आ सकती है। भीतर पहने जाते हर वस्त्र को रोज बदलिए। इसमें आपके मोजे भी शामिल हैं। पसीना अगर ज्यादा आया हो या आता रहता हो तो भीतरी वस्त्र बदलने के लिए अगली सुबह का इंतजार मत करिए। उन्हें रोज दो बार बदलकर स्वयं को सुरक्षित कर लीजिए। बाहरी वस्त्र भी आपको रोज बदलने चाहिए। बाहरी वस्त्रों में कहीं दाग या छिद्र न हो। इस्त्री ठीक से की गई हो। जूतों पर पॉलिश भी इतनी ही जरूरी है।
* गंध आपके बदन से भी आ सकती है। रोज किसी अच्छे साबुन से सर से पाँव तक नहाइए। नहाने के नाम पर केवल भीगकर बाहर न निकल आएँ। बदन के किसी भी जोड़ पर केश न रहने दें। केश में गंध फँसी रहती है। हर जोड़ पर अतिरिक्त साबुन लगाएँ।
* हाथ के ही नहीं, पैर के भी नाखून कभी न बढ़ने दें, उनमें मैल भी जमा न होने दें।
अब व्यावहारिक सावधानियाँ
* कहीं भी पान की पीक मारना, थूक देना, जम्हाई के समय मुँह पर हाथ न रखना, बार-बार गला साफ करते रहना, जाने-अनजाने कहीं भी खुजा देना, खाते वक्त बड़े-बड़े कौर भरना, ऐसी फूहड़ताओं से युवतियाँ चिढ़ जाती हैं।
* बातचीत के दौरान युवती की महत्वाकांक्षाओं, आदतों, शौक आदि की चर्चा करें। स्वयं के बारे में तभी कुछ बताएँ, जब पूछा जाए। हर दम अपनी ही बढ़ाई करने में डूबे युवक का इम्प्रेशन बिगड़ते देर नहीं लगती। भले ही वो जरा भी असत्य न बोल रहा हो!
* युवती जब कुछ बोल या बता रही हो, तब इधर-उधर देखते रहना, यूँ ही हाँ-हूँ करना, किसी आते-जाते पर कमेंट पास करना... इनसे बचें। युवती की नजर से नजर मिलाकर ही सब सुनें। लेकिन घूरें नहीं। जो सुनें, याद भी रखें ताकि अगली मुलाकात में उल्लेख कर सकें।
* अचानक गला फाड़कर हँसना, ताली बजा बैठना, धौल-धप्पा करना, भद्दे चुटकुले सुनाना, दूसरों को डरपोक और स्वयं को बहादुर साबित करना, समूची औरत जात को लेकर ताना कसना, किन्हीं दो स्त्रियों की तुलना करने लगना, स्त्रियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझना...किसी भी सूरत में इन कमजोरियों को अपने नजदीक न फटकने दें।
* युवती के साथ घूमने निकले हों, तब उससे आगे-आगे कभी न चलें।
* युवती को छूने से यथासंभव बचें। गपशप के दौरान अगर वो आपके हाथ पर कहीं छूती है तो अब वो केवल परिचिता नहीं रही, बल्कि दोस्त बन चुकी है। अगर घुटने पर कहीं छुए तो अब वो आपकी केवल दोस्त नहीं बल्कि गहरी दोस्त है। उसे न केवल स्नेह, बल्कि इज्जत के साथ सँजोकर रखें। उसके साथ अपनी आत्मीयता को किसी खजाने से कम न समझें। दूसरों के सामने इस आत्मीयता की चर्चा कदापि न करें, छेड़ा अथवा पूछा जाए, तब भी नहीं।
क्या ऐसा होता है कि जब भी आप किसी युवती की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, वो पीछे हट जाती है। चेहरे-मोहरे से आप खासे अच्छे हैं। बढ़िया नौकरी से लगे हुए हैं। सबके साथ व्यवहार में भी मीठे हैं। फिर भी युवतियाँ हमेशा आपकी ओर से मुँह क्यों फेर लेती हैं?
न केवल आज, बल्कि कॉलेज के दिनों से ही ऐसा होता आया है। नहीं, यह भाग्य का खेल नहीं है। यह तो यथासंभव आपका अपना ही खेल है, जिसे स्वयं आपने बिगाड़ रखा है!
कहीं ऐसा तो नहीं कि...
* आप की साँसों में गंध है। खुद आपको इसका पता नहीं है। हो भी नहीं सकता। फौरन अपने डॉक्टर से मिलिए। असलियत वो ही बता सकेगा। छुटकारे के उपाय भी वो ही सुझाएगा। किसी भी उपाय की उपेक्षा मत करिए। रात को सोने से पहले ब्रश अवश्य कीजिए।
* गंध आपके वस्त्रों से भी आ सकती है। भीतर पहने जाते हर वस्त्र को रोज बदलिए। इसमें आपके मोजे भी शामिल हैं। पसीना अगर ज्यादा आया हो या आता रहता हो तो भीतरी वस्त्र बदलने के लिए अगली सुबह का इंतजार मत करिए। उन्हें रोज दो बार बदलकर स्वयं को सुरक्षित कर लीजिए। बाहरी वस्त्र भी आपको रोज बदलने चाहिए। बाहरी वस्त्रों में कहीं दाग या छिद्र न हो। इस्त्री ठीक से की गई हो। जूतों पर पॉलिश भी इतनी ही जरूरी है।
* गंध आपके बदन से भी आ सकती है। रोज किसी अच्छे साबुन से सर से पाँव तक नहाइए। नहाने के नाम पर केवल भीगकर बाहर न निकल आएँ। बदन के किसी भी जोड़ पर केश न रहने दें। केश में गंध फँसी रहती है। हर जोड़ पर अतिरिक्त साबुन लगाएँ।
* हाथ के ही नहीं, पैर के भी नाखून कभी न बढ़ने दें, उनमें मैल भी जमा न होने दें।
अब व्यावहारिक सावधानियाँ
* कहीं भी पान की पीक मारना, थूक देना, जम्हाई के समय मुँह पर हाथ न रखना, बार-बार गला साफ करते रहना, जाने-अनजाने कहीं भी खुजा देना, खाते वक्त बड़े-बड़े कौर भरना, ऐसी फूहड़ताओं से युवतियाँ चिढ़ जाती हैं।
* बातचीत के दौरान युवती की महत्वाकांक्षाओं, आदतों, शौक आदि की चर्चा करें। स्वयं के बारे में तभी कुछ बताएँ, जब पूछा जाए। हर दम अपनी ही बढ़ाई करने में डूबे युवक का इम्प्रेशन बिगड़ते देर नहीं लगती। भले ही वो जरा भी असत्य न बोल रहा हो!
* युवती जब कुछ बोल या बता रही हो, तब इधर-उधर देखते रहना, यूँ ही हाँ-हूँ करना, किसी आते-जाते पर कमेंट पास करना... इनसे बचें। युवती की नजर से नजर मिलाकर ही सब सुनें। लेकिन घूरें नहीं। जो सुनें, याद भी रखें ताकि अगली मुलाकात में उल्लेख कर सकें।
* अचानक गला फाड़कर हँसना, ताली बजा बैठना, धौल-धप्पा करना, भद्दे चुटकुले सुनाना, दूसरों को डरपोक और स्वयं को बहादुर साबित करना, समूची औरत जात को लेकर ताना कसना, किन्हीं दो स्त्रियों की तुलना करने लगना, स्त्रियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझना...किसी भी सूरत में इन कमजोरियों को अपने नजदीक न फटकने दें।
* युवती के साथ घूमने निकले हों, तब उससे आगे-आगे कभी न चलें।
* युवती को छूने से यथासंभव बचें। गपशप के दौरान अगर वो आपके हाथ पर कहीं छूती है तो अब वो केवल परिचिता नहीं रही, बल्कि दोस्त बन चुकी है। अगर घुटने पर कहीं छुए तो अब वो आपकी केवल दोस्त नहीं बल्कि गहरी दोस्त है। उसे न केवल स्नेह, बल्कि इज्जत के साथ सँजोकर रखें। उसके साथ अपनी आत्मीयता को किसी खजाने से कम न समझें। दूसरों के सामने इस आत्मीयता की चर्चा कदापि न करें, छेड़ा अथवा पूछा जाए, तब भी नहीं।
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